रोगों से हमेशा के लिए बचना है, और स्वस्थ रहना है तो पालन करें इन उपायों का । Health tips to avoid illness
उत्तम स्वास्थ्य के निर्धारक तत्वों में आहार प्रमुख है ।उचित एवं युक्ति संगत आहार के बिना स्वस्थ रहना असंभव है । हमारे उपनिषदों आदि ग्रंथो में तो आहार को ही जीवन कहा गया है- " अन्न वै प्राण: " । आहार स्वंय में औषधि है, इससे शरीर के त्रिदोष (वात,कफ,पित्त) और सप्त धातुओं की वृधि व् पुष्ठी होती है । आहार का प्रभाव केवल शरीर पर ही नहीं मन पर भी समान रूप से पड़ता है। लोकप्रसिद्ध भी है- जैसा खायें अन्न, वेसा बने मन । सात्विक एवम् अच्छे आहार में हमे हर प्रकार की बीमारी से दूर रखने की क्षमता होती है किन्तु आहार हमारे स्वस्थ्य के लिए तभी हितकारी सिद्ध होगा, जब हम इसका सेवन मात्र स्वाद की द्रष्टी से न करके स्वास्थ्य की द्रष्टी से करेंगें । हमेशा याद रखें की ' हमारा जीवन खाने के लिए नही, अपितु खाना जीवन जीने के लिए है'। आयुर्वेद में आहार सेवन के लिए कुछ विशेष बातें बताई गई है; जिन्हें आदर्श आहार-सहिंता कहा गया है।
* भोजन सुन्दर, एकान्त व् शान्त स्थान पर बैठ कर करना चाहिए ।
* भोजन स्निग्ध ( उचित मात्रा में शुद्ध तेल, घी आदि से युक्त ) होना चाहिये।
* भोजन ताजा व गुनगुना होना चाहिए न कि डब्बा पैक व सडा-गला ।
* उच्च स्वरयुक्त ( गाना बजाना, टीवी तथा वाद्ययंत्र ) वाले स्थान पर बैठकर भोजन नही करना चाहिये ।
* उचित स्थान पर पालथी मारकर, आराम पूर्वक बैठ कर भोजन करना उत्तम माना जाता है
* भोजन को हमेशा चबा-चबाकर, धीरे-धीरे खाना चाहिए । इससे भोजन का सही प्रकार से पाचन होता है ।
* भोजन करते समय बात नहीं करनी चाहिये ।
* हमेशा शांत व प्रशन्न मन से भोजन करना चाहिये । भोजन करते समय भोजन के प्रति प्रशंसा का भाव व
सकारात्मक सोच रखनी चाहिये ।
* भोजन का समय निश्चित होना चाहिय । शास्त्र में भी लिखा है कि ' कालभोजनम्,आरोग्यकारणम ' अतः सुबह, दोपहर व रात्रि में सही समय पर शरीर की आवश्यकतानुसर व उचित मात्रा में ही भोजन ग्रहण करना चाहिए ।
पथ्य और उचित आहार लेने वाला व्यक्ति पहले तो रोगी ही नहीं होता, यदि किसी कारणवश रोगी हो भी जाए, तो परहेज पूर्वक भोजन से रोग बढ़ता नहीं और स्वतः ठीक हो जाता है । इस प्रकार औषधि की आवश्यकता नही होती । इसके विपरीत यदि मनुष्य अच्छी से अच्छी औषधि का सेवन तो करता है, परन्तु पथ्य-परहेज नहीं करता, तो भी रोग ठीक नही होता, उसकी औषधि व्यर्थ हो जाती है ।
अर्थात औषधि के बिना भी रोग केवल सही खान-पान से दूर हो जाता है ।
चरक ऋषि ने भी कहा है कि- " अन्न प्राणियों के लिए प्राण है," इसलिए लोग अन्न की और दौड़ते है । हमारे रंग का निखार, सुन्दर स्वर, जीवन, सुख, पुष्टि, बल और मेधा- ये सभी अन्न पर ही निर्भर है ।

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